Vocal for Local
GS 3
आत्मनिर्भर भारत की सुनहरी तस्वीर तैयार होगी। ऐसा नहीं है कि सिर्फ बड़ी-बड़ी चीजें ही भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगी। भारत में बने कपड़े, हैंडीक्राफ्ट, भारत के इलेक्ट्रिक उपकरण, हर एक क्षेत्र में देश के गौरव को बढ़ाने का काम करेंगे। आत्मनिर्भरता के पहली शुरूआत अपने देश की बने उत्पादों पर गर्व महसूस करना है। उनका प्रयोग करना है। जब हम और आप ऐसा करेंगे तो आत्मनिर्भर अभियान। सिर्फ एक अभियान ना रहकर एक राष्ट्रीय भावना में तब्दील होगा। एक चेतना का काम करेगा। जरा याद कीजिए कोरोना काल को, जब सबके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। प्रधानमंत्री ने वोकल फॉर लोकल का मंत्र दिया। वोकल फॉर लोकल का मतलब है कि देश में निर्मित वस्तुओं को केवल खरीदें नहीं, बल्कि साथ में गर्व से इसका प्रचार भी करें। हर ब्रांड पहले लोकल ही थे। उसके बाद ही ग्लोबल ब्रांड बने हैं। ठीक उसी तरह हमें अपने लोकल प्रोडक्ट्स को ग्लोबल ब्रांड बनाना है। पहले खादी भी लोकल था पर अब यह भी ब्रांड है। इसे ब्रांड बनाने का काम किया है स्वदेशी की भावना ने। लोगों की सोच में बदलाव आया है। वोकल फॉर लोकल की सोच अब जमीन पर सफल होती दिख रही है। मामला दिवाली का हो या फिर रक्षा बंधन, होली या गणेश उत्सव का, बाजार में अब लोकल सामानों की मांग में बढ़ रही है।